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बà¥à¤–ार से न घबराà¤à¤‚, सही टà¥à¤°à¥€à¤Ÿà¤®à¥‡à¤‚ट कराà¤à¤‚
इस मौसम में फीवर à¤à¤• सामानà¥à¤¯ बात है। इससे घबराने की जरूरत नहीं। मौसमी बà¥à¤–ार पर पूरी जानकारी...
बà¥à¤–ार से न घबराà¤à¤‚, सही टà¥à¤°à¥€à¤Ÿà¤®à¥‡à¤‚ट कराà¤à¤‚
इस मौसम में फीवर à¤à¤• सामानà¥à¤¯-सी बात है। इससे घबराने की जरूरत नहीं है। जरूरत है तो सही वकà¥à¤¤ पर, सही इलाज की। मौसमी बà¥à¤–ार पर पूरी जानकारी:
इन दिनों होने वाले बà¥à¤–ार के जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾à¤¤à¤° मामले वायरस के हैं, लेकिन मलेरिया, निमोनिया, टायफायड के अलावा इकà¥à¤•ा-दà¥à¤•à¥à¤•ा मामले डेंगू के à¤à¥€ सामने आ रहे हैं। à¤à¤¸à¥‡ में कई तरह के बà¥à¤–ारों की पहचान और उसके मà¥à¤¤à¤¾à¤¬à¤¿à¤• इलाज की जरूरत होती है।
कà¥à¤¯à¤¾ करें?
मैकà¥à¤¸ हॉसà¥à¤ªà¤¿à¤Ÿà¤² में इंटरनल मेडिसिन की कंसलà¥à¤Ÿà¥‡à¤‚ट डॉ. मीनाकà¥à¤·à¥€ जैन के मà¥à¤¤à¤¾à¤¬à¤¿à¤•, 100 डिगà¥à¤°à¥€ फॉरेनहाइट तक बà¥à¤–ार में दवा की जरूरत नहीं होती, लेकिन बà¥à¤–ार इसी रेंज में 4-5 या जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ दिन तक बना रहे या बढ़ जाठतो फौरन डॉकà¥à¤Ÿà¤° के पास जाà¤à¤‚। 102 डिगà¥à¤°à¥€ फॉरेनहाइट तक बà¥à¤–ार है और कोई असामानà¥à¤¯ लकà¥à¤·à¤£ नहीं हैं तो मरीज की देखà¤à¤¾à¤² घर पर ही कर सकते हैं। उसके शरीर पर सामानà¥à¤¯ पानी की पटà¥à¤Ÿà¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ तब तक रखें, जब तक तापमान कम न हो जाà¤à¥¤
मरीज को हर छह घंटे में पैरासिटामॉल की à¤à¤• गोली दे सकते हैं। यह कà¥à¤°à¥‹à¤¸à¤¿à¤¨, कालपोल आदि बà¥à¤°à¥ˆà¤‚ड नेम से मिलती है। यह बà¥à¤–ार की सबसे सेफ दवा है। दूसरी कोई गोली डॉकà¥à¤Ÿà¤° से पूछे बिना न दें, खासकर कॉमà¥à¤¬à¤¿à¤«à¥à¤²à¥‡à¤®, बà¥à¤°à¥‚फेन या à¤à¤¸à¥à¤ªà¥à¤°à¥€à¤¨ न लें, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि अगर डेंगू है तो इनसे पà¥à¤²à¥‡à¤Ÿà¤²à¥‡à¤Ÿà¥à¤¸ कम हो जाà¤à¤‚गे। 10 साल तक के बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को हर चार घंटे में 1 मिली लीटर पà¥à¤°à¤¤à¤¿ किलो वजन के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° दवा दे सकते हैं। दो दिन तक बà¥à¤–ार ठीक न हो तो डॉकà¥à¤Ÿà¤° के पास ले जाà¤à¤‚।
मरीज को वाइरल है तो उससे थोड़ी दूरी बनाठरखें और उसकी इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² की गई चीजें इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² न करें। मरीज को पूरा आराम करने दें, खासकर तेज बà¥à¤–ार में। आराम à¤à¥€ बà¥à¤–ार में इलाज का काम करता है। मरीज छींकने से पहले नाक और मà¥à¤‚ह पर रà¥à¤®à¤¾à¤² रखें। इससे वाइरल होने पर दूसरों में नहीं फैलेगा। धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखें कि वह अपने हाथ à¤à¥€ अचà¥à¤›à¥€ तरह से साफ करें।
बचà¥à¤šà¥‡ को वाइरल है तो सà¥à¤•ूल न à¤à¥‡à¤œà¥‡à¤‚। इससे बीमारी दूसरे बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में नहीं फैलेगी। मरीज के कमरे में ताजा हवा आने दें। à¤à¤¸à¥€ का तापमान 23-24 डिगà¥à¤°à¥€ के आसपास रखें। मरीज हलà¥à¤•े गà¥à¤¨à¤—à¥à¤¨à¥‡ पानी से नहा ले तो बेहतर है। फà¥à¤°à¥‡à¤¶ लगेगा।
कब जाà¤à¤‚ डॉकà¥à¤Ÿà¤° के पास?
बà¥à¤–ार अगर 102 डिगà¥à¤°à¥€ से जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ है या कम बà¥à¤–ार में à¤à¥€ उलटी, दसà¥à¤¤, चकà¥à¤•र, सिर, आंखों, बदन या जोड़ों में दरà¥à¤¦ जैसे लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ में से कोई à¤à¥€ लकà¥à¤·à¤£ है, तो फौरन डॉकà¥à¤Ÿà¤° के पास जाà¤à¤‚।
कैसे-कैसे बà¥à¤–ार
टायफायड
इसे à¤à¤‚टà¥à¤°à¥€ फीवर और मियादी बà¥à¤–ार à¤à¥€ कहते हैं। यह सैलà¥à¤®à¥‹à¤¨à¥‡à¤²à¤¾ बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ से होता है, जिससे आंत में जखà¥à¤® (अलà¥à¤¸à¤°) हो जाता है और इस वजह से बà¥à¤–ार होता है। यह बà¥à¤–ार आमतौर पर धीरे-धीरे बढ़ता है। पहले दिन में, फिर थोड़ा तेज और धीरे-धीरे बढ़ता जाता है।
कैसे फैलता है?
टायफायड खराब पानी से फैलता है। टायफायड वैकà¥à¤¸à¥€à¤¨ लगी होने के बावजूद यह बà¥à¤–ार हो सकता है, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि यह वैकà¥à¤¸à¥€à¤¨ 65 फीसदी ही सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¾ देती है।
कितने दिन रहता है?
3-4 हफà¥à¤¤à¥‡ (इलाज न हो तो यह लंबा खिंच जाता है।)
लकà¥à¤·à¤£
तेज बà¥à¤–ार (जो धीरे-धीरे बढ़ता है), सिर दरà¥à¤¦, कमजोरी, उलटी, जी मितलाना, दसà¥à¤¤, पेटदरà¥à¤¦, कà¤à¥€-कà¤à¥€ पॉटी में खून। आमतौर पर शरीर में दरà¥à¤¦ नहीं होता।
टेसà¥à¤Ÿ
बà¥à¤²à¤¡ कलà¥à¤šà¤°à¥¤ कà¤à¥€-कà¤à¥€ विडाल और टायफिडॉट टेसà¥à¤Ÿ à¤à¥€ कराते हैं।
इलाज
इसमें à¤à¤‚टी-बायोटिक दवा आमतौर पर दो हफà¥à¤¤à¥‡ के लिठदी जाती है। कई बार दवा देने के बाद à¤à¥€ बà¥à¤–ार उतरने में 4-5 दिन लग सकते हैं, इसलिठपरेशान न हों। हाथ बिलà¥à¤•à¥à¤² साफ रखें और पानी साफ और उबालकर पिà¤à¤‚।
मलेरिया
यह ‘पà¥à¤²à¤¾à¤œà¥à¤®à¥‹à¤¡à¤¿à¤¯à¤®â€™ नाम के पैरासाइट से होता है, जो मचà¥à¤›à¤° इंसानों में फैलाते हैं। माना जाता है कि मलेरिया में à¤à¤• दिन छोड़कर बà¥à¤–ार आता है, लेकिन à¤à¤¸à¤¾ जरूरी नहीं है।
कैसे फैलता है?
मलेरिया मादा ‘à¤à¤¨à¥‡à¤«à¤¿à¤²à¥€à¤œâ€™ मचà¥à¤›à¤° के काटने से होता है, जो गंदे पानी में पनपते हैं। ये मचà¥à¤›à¤° आमतौर पर दिन ढलने के बाद काटते हैं।
कितने दिन रहता है?
1-2 हफà¥à¤¤à¥‡ (इलाज के बिना यह लंबा खिंच जाता है)
लकà¥à¤·à¤£
रह-रह कर (कà¤à¥€-कà¤à¥€ लगातार à¤à¥€) ठंड के साथ तेज बà¥à¤–ार, सिर दरà¥à¤¦, कंपकंपी महसूस होना, शरीर दरà¥à¤¦, उलटी, जी मितलाना, कमजोरी आदि। कà¤à¥€-कà¤à¥€ मरीज बेहोश à¤à¥€ हो जाता है।
टेसà¥à¤Ÿ
बà¥à¤²à¤¡ सà¥à¤®à¥‡à¤¯à¤° टेसà¥à¤Ÿ और मलेरिया à¤à¤‚टीजन। बà¥à¤²à¤¡ सà¥à¤®à¥‡à¤¯à¤° टेसà¥à¤Ÿ चढ़े बà¥à¤–ार में किया जाता है।
इलाज
इसमें कà¥à¤²à¥‹à¤°à¥‹à¤•à¥à¤µà¤¿à¤¨ जैसी à¤à¤‚टी-मलेरियल दवा दी जाती है। इन दवाओं के साइड-इफेकà¥à¤Ÿà¥à¤¸ हो सकते हैं, इसलिठइनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ डॉकà¥à¤Ÿà¤° की सलाह के बिना न लें।
वाइरल
वाइरल यरल कहलाता है। आमतौर पर यह मौसम बदलने पर होता है।
कैसे फैलता है?
आमतौर पर इंफेकà¥à¤¶à¤¨ वाले शखà¥à¤¸ और उसके कॉनà¥à¤Ÿà¥ˆà¤•à¥à¤Ÿ में आई चीजों जैसे फोन, हैंडल, टॉवल आदि छूने या इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² करने से फैलता है।
कितने दिन रहता है?
3 से 5 दिनों तक।
लकà¥à¤·à¤£
हलà¥à¤•ा बà¥à¤–ार, खांसी, नाक बहना या नाक बंद होना, सिर दरà¥à¤¦, शरीर में दरà¥à¤¦, थकावट, गला खराब आदि। टेसà¥à¤Ÿ 95 फीसदी मामलों में टेसà¥à¤Ÿ की जरूरत नहीं होती।
डेंगू
डेंगू 3 तरह का होता है: 1. कà¥à¤²à¤¾à¤¸à¤¿à¤² (साधारण) डेंगू फीवर 2. डेंगू हैमरेजिक फीवर (DHF), 3. डेंगू शॉक सिंडà¥à¤°à¥‹à¤® (DSS)
कैसे फैलता है?
डेंगू मादा à¤à¤¡à¥€à¤¸ इजिपà¥à¤Ÿà¥€ मचà¥à¤›à¤° के काटने से होता है।
कितने दिन रहता है?
5 से 10 दिन तक।
लकà¥à¤·à¤£
ठंड लगने के बाद तेज बà¥à¤–ार, तेज सिरदरà¥à¤¦, आंखों के पीछे दरà¥à¤¦, कमजोरी, उलटी, पेट दरà¥à¤¦, चकà¥à¤•र, सà¥à¤•िन का लाल होना
टेसà¥à¤Ÿ
à¤à¤‚टीजन बà¥à¤²à¤¡ टेसà¥à¤Ÿ (à¤à¤¨à¤à¤¸ 1) और डेंगू सिरॉलजी। à¤à¤¨à¤à¤¸1 पहले दिन ही पॉजिटिव आ जाता है, लेकिन धीरे-धीरे पॉजिटिविटी कम होने लगती है। 4-5 दिन बाद टेसà¥à¤Ÿ कराते हैं तो à¤à¤‚टीबॉडी टेसà¥à¤Ÿ (डेंगू सिरॉलजी) कराना बेहतर है।
इलाज
साधारण डेंगू बà¥à¤–ार का इलाज घर पर ही हो सकता है। मरीज को पूरा आराम करने दें। हर छह घंटे में पैरासिटामोल दें और पानी और तरल चीजें पिलाà¤à¤‚। अगर डेंगू हैमरेजिक फीवर या शॉक सिंडà¥à¤°à¥‹à¤® का लकà¥à¤·à¤£ (मसूढ़ों या पॉटी में खून, सà¥à¤•िन पर गहरे नीले चकतà¥à¤¤à¥‡, चकà¥à¤•र) दिखाई दे तो मरीज को फौरन डॉकà¥à¤Ÿà¤° के पास ले जाà¤à¤‚।
धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखें
टायफायड के अलावा किसी और बà¥à¤–ार में à¤à¤‚टीबायोटिक की जरूरत नहीं होती। कà¤à¥€-कà¤à¥€ वाइरल के साथ इनà¥à¤«à¥‡à¤•à¥à¤¶à¤¨ होने पर à¤à¥€ à¤à¤‚टीबायोटिक दी जाती हैं, लेकिन à¤à¤¸à¤¾ सिरà¥à¤« डॉकà¥à¤Ÿà¤° के कहने पर करें। खà¥à¤¦ à¤à¤‚टीबायोटिक न लें। जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ à¤à¤‚टीबायोटिक लेने से शरीर इमà¥à¤¯à¥‚न हो जाता है और शरीर के गà¥à¤¡ बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ à¤à¥€ मर जाते हैं। वाइरल में तीन दिन का रेसà¥à¤Ÿ जरूर करें।
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